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मैं सब कुछ भूल गया / मनीष सोनी

  वक्त चल रहा था पर मैं ठहर गया, बैठे बैठे तेरे ख्यालों में कहीं खो गया। कलम चलती रही, शब्द बनते गए, कविता लिखने बैठा था पर हर पन्ने पर तेरा नाम लिख दिया। जब तुझसे मिलना था तब सोचा था की खूब बातें करूँगा, पर जब मिला तो तुझ में ही कहीं गुम हो गया। कुछ उदासी, कुछ दलीलें, कुछ मायूसी भर के लाया था मन में, तूने मुस्कुराकर क्या देखा, मैं सब कुछ भूल गया।                                                  - मनीष सोनी

अधूरा इश्क / मनीष सोनी

प्रेम ने दो अलग धर्मों को एक धागे में पिरोया था,   इक प्यार में था तो दूजा इश्क में।   कसमें हुई, वादे हुए, दुआएँ हुई, वो मोहब्बत का खूबसूरत दौर था,   अब "मैं" का हिस्सा वो दोनों थे।   उन सालों को उन्होंने जमानों की तरह जिया था,   हर पल एक-दूसरे के ख्यालों में खोए रहना, हँसी-ठिठोलियाँ और कुछेक प्यारी तकरारों, इन्हीं में निकल जाता था पूरा दिन।   अन्ततः इज़हार-ए-मोहब्बत जब समाज के समक्ष हुआ,   तब इस प्रेम के कोमल धागे में कुछ गाँठे पड गई।   वो उसे पाने के लिये पूरे समाज से लड पडी थी, पर   जब वो अपनी लड़ाई में फतह की और थी तब तक उसकी  मोहब्बत दम तोड़ चुकी थी।   अब इश्क की सारी वफाएँ बेवफा हो चुकी थी,   वो बिलखी, गिड़गिडाई, रोई अपने प्यार और विश्वास के लिये।   पर उसके इश्क का अन्जाम धोखा ही हुआ,   और एक मुकम्मल होता खूबसूरत इश्क "नफरत" को भेंट चढ़ गया।।               ...

इश्क की खूबसूरती / मनीष सोनी

                 यूँ  भीड़ में बेबाकी से मेरी निगाहों का तुझे ढूंढना,                   और नजरें मिलते ही नजर चुरा लेना मेरा।                   यूँ  हर पल तुझसे बात करने के बहाने ढूंढना,                  और घण्टों तेरी याद में बीता देना मेरा।                  यूँ उन शब के ख्वाबों में यथार्थता ढूंढना,                  और हर शब ईश्वर से तेरे लिए दुआ मांगना मेरा।  

सफरनामा / मनीष सोनी

अक्सर    सुना    करता    था    कि    सुबह    देखा    हुआ    स्वप्न    सच    हो    जाता    है   और    अंततः    उस    दिन    भी    ऐसा    ही    कुछ    हुआ ,   तुम्हारे    साथ    बिताये    हुए    वह    नौ    घंटे    छियालीस    मिनट    शायद    ज़िंदगी    के    बेहतरीन    पलो    में    से    एक    थे ।   उस    दिन    मैं    मेरे    और    तुम्हारे    बचपन    की    उभयनिष्ठता    से    अनभिज्ञ    हुआ ,   वो    तुम्हारा    छोटी-छोटी    बातों    में...