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इश्क की खूबसूरती / मनीष सोनी

                 यूँ  भीड़ में बेबाकी से मेरी निगाहों का तुझे ढूंढना,                   और नजरें मिलते ही नजर चुरा लेना मेरा।                   यूँ  हर पल तुझसे बात करने के बहाने ढूंढना,                  और घण्टों तेरी याद में बीता देना मेरा।                  यूँ उन शब के ख्वाबों में यथार्थता ढूंढना,                  और हर शब ईश्वर से तेरे लिए दुआ मांगना मेरा।  

सफरनामा / मनीष सोनी

अक्सर    सुना    करता    था    कि    सुबह    देखा    हुआ    स्वप्न    सच    हो    जाता    है   और    अंततः    उस    दिन    भी    ऐसा    ही    कुछ    हुआ ,   तुम्हारे    साथ    बिताये    हुए    वह    नौ    घंटे    छियालीस    मिनट    शायद    ज़िंदगी    के    बेहतरीन    पलो    में    से    एक    थे ।   उस    दिन    मैं    मेरे    और    तुम्हारे    बचपन    की    उभयनिष्ठता    से    अनभिज्ञ    हुआ ,   वो    तुम्हारा    छोटी-छोटी    बातों    में...

काश / मनीष सोनी

काश कभी हम मिले ही नहीं होते, न कभी बातें होती, न मुलाकातें।   काश मन भी वश में होता और इश्क भी,   न यादें होती, न इश्क की भीख माँगनी पडती।   काश ये गमज़दा शबें  गुमशुदा होती,   न उनके ख्वाब होते, न दुआएँ होती।   न चर्चें होते, न दिल्लगी,   न मुस्कुराहट के पीछे दर्द होता, न दिल बिखरते।   काश कभी हम मिले ही नहीं होते,   न गज़लें होती, न इश्क का तमाशा बनता।                                                              ~ मनीष सोनी                             25-08-2018                              01:09 AM