मैं सब कुछ भूल गया / मनीष सोनी


 वक्त चल रहा था पर मैं ठहर गया,

बैठे बैठे तेरे ख्यालों में कहीं खो गया।


कलम चलती रही, शब्द बनते गए,

कविता लिखने बैठा था पर हर पन्ने पर तेरा नाम लिख दिया।


जब तुझसे मिलना था तब सोचा था की खूब बातें करूँगा,

पर जब मिला तो तुझ में ही कहीं गुम हो गया।


कुछ उदासी, कुछ दलीलें, कुछ मायूसी भर के लाया था मन में,

तूने मुस्कुराकर क्या देखा, मैं सब कुछ भूल गया।

                                                 - मनीष सोनी


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